मेरी पहली हिन्दी कविता !! इसका श्रेय जाता है मित्र सुनील को | उसने अपने ब्लॉग पर नये साल पर एक कविता लिखी | उसे पढ़ते पढ़ते मुजमे भी अन्दर से कुछ शब्द आकार लेने लगे | और उस काव्य की समीक्षा में मैंने यह काव्य लिखा | आशा है सुनिलभाई के साथ साथ मेरा कविता से फ़िर से नाता जुडेगा |
नया साल बस एक पड़ाव है |
जीवन का सफर यूँही चलने का नाम है |
दौर आशा निराशा का , राहे यहाँ सुख दुःख की,
यहाँ मुस्कुराती सुबह और आनंदित शाम है |
क्या लक्ष है तेरा , पहुंचना है कहा ?
बस ये जानना जरुरी , बाकी भरोसा राम है |
कोई साथी, कोई मित्र, कोई सखा तो कोई गुरु,
जो जितना साथ दे वोह उसका अहेसान है |
मन में उमंग और आँखों में स्नेह ,
प्रेम भक्ति में जुटे रहे, और कौनसा काम है ?
जीवन के उस उत्सव में, चले चले यु चले चले,
जीवन धारा राम है , जीवन धारा श्याम है |
नया साल बस एक पड़ाव है |
जीवन का सफर यूँही चलने का नाम है |
क्या लक्ष है तेरा , पहुंचना है कहा ?
बस ये जानना जरुरी , बाकी भरोसा राम है |
कोई साथी, कोई मित्र, कोई सखा तो कोई गुरु,
जो जितना साथ दे वोह उसका अहेसान है |
Sharuat ma koina pan upar wishwas hovo jaruri chhe,pachhi dhire dhire jate j te bhav Ishwar taraf vali jay chhe, Prabhu taraf wishwas hovathi mushkelio ochhi taklif aape chhe, manma dhiraj bandhay chhe…Mane Gamyu
Comment by tushar — January 13, 2009 @ 1:08 pm
The poem was amazing……..philosophy, simplicity, God-fearing attitude- all rolled in one!!!!!
Keep writing such good stuff!!!!
Comment by Minal — June 2, 2010 @ 9:17 am